Wednesday, March 8, 2017

ये जाति और मज़हब की दीवारें.............


ये जाति और मज़हब की दीवारें.............


ये जाति और मज़हब की दीवारें गरीब-मजदूर-मध्यमवर्गीय लोगों को बाटे रखने के लिए है....नीचे की लिस्ट जरूर पढ़े...और जचे तो शेयर करना न भुलें...
बुर्जवा-शोषक-संपत्तिवान-शासक तबके के लिए मजहब कही दीवार नहीं...
विवाह संबंध..एक गरीब-मजदूर-मध्यमवर्गीय मुस्लमान और गरीब-मजदूर-मध्यमवर्गीय हिन्दु के बीच होता तो एक नया गोधरा या सहारनपुर कांड होने में देर न लगती....
दोनों मज़हबों के ठेकेदार फतवे जारी करते.... प्रेमी-प्रमीका/पति-पत्नी की ऑनर किलिंग हो जाती..
उनकी लाश को दरख्तों पर टांग दिया जाता... कि उसे देख कोई दूसरा दुसाहस न कर सके....
[8/3 6:31 am] अश्विनीकुमार 'सुकरात' जनचेतना-अभियान : 
मज़हब और जाति .........
सिर्फ और सिर्फ शारीरिक एवं मानसिक मजदूरी करने वाले मजदूर-गरीब-मध्यम वर्ग को बांटे रखने का हथियार है...
हिन्दु-मुस्लमान वैवाहिक संबंधों को लेकर आयी पोस्ट को पढ़े फिर हमारे जबाब को भी.....Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏 जब इंसानियत का अंकुर फुटेगा..तब मज़हब और जाति की दीवार टुटेगाDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/ff2/1.5/16/1f33a.png🌺Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/ff2/1.5/16/1f33a.png🌺Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fca/1.5/16/1f339.png🌹
[8/3 12:08 am] +91 88003 67284: *दामादों को तो पलकों पर बिठाया जाता है,*
फिर भारत के हिन्दू, मुसलमानों से इतनी घृणा करने का ड्रामा क्यों करते हैं?
जब जानते हैं, बादशाह अकबर। हिन्दुओं के दामाद थे। अकबर ने जोधाबाई से शादी की थी।
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉आज के भी कुछ उहाहरण देखिये-Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/f27/1.5/16/1f447_1f3ff.png👇🏿Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/f27/1.5/16/1f447_1f3ff.png👇🏿
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉1. विश्व हिन्दू परिषद के नेता अशोक सिंघल ने अपनी बेटी की शादी मुख़्तार अब्बास नकवी से की हैDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd7/1.5/16/2757.png
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉2. मुरली मनोहर जोशी ने अपनी बेटी की शादी शाहनवाज़ हुसैन से की हैDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd7/1.5/16/2757.png
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉3. मोदी की भतीजी की शादी मुस्लिम से हुई हैDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd7/1.5/16/2757.png
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉4. लाल कृष्णा आडवानी की बेटी ने दूसरी शादी मुस्लिम से की हैDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd7/1.5/16/2757.png
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉5. सुब्रह्मनियम स्वामी की बेटी "सुहासिनी " ने मुस्लिम से शादी की हैDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd7/1.5/16/2757.png
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉6. शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने अपनी पोती की शादी मुस्लिम से कीDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd7/1.5/16/2757.png
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉7. मुसलमानों के खिलाफ सबसे ज़्यादा ज़हर उगलने वाला विहिप का नेता प्रवीण तोगडि़या की बहन से शादी करने वाला मुस्लिम आज बहुत बड़ा रईस है।तोगड़िया आज भी अपनी बहन से मधुर सम्बन्ध रखता हैDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd7/1.5/16/2757.png
*शाहरुख खान* 
की पत्नी *गौरी छिब्बर* एक हिंदू है।
*आमिर खान*
की पत्नि *रीमा दत्ता*
*किरण राव*
*सैफ अली खान* 
की पत्नि *करीना कपूर*
इसके पिता *नवाब पटौदी* ने भी हिंदू लड़की *शर्मीला टैगोर* से शादी की थी।
*फरहान अख्तर*
की पत्नी *अधुना भवानी* और
*फरहान आजमी*
की पत्नी *आयशा टाकिया* भी हिंदू हैं।
*अमृता अरोड़ा* की शादी एक मुस्लिम से हुई है जिसका नाम *शकील लदाक* है।
सलमान खान के भाई *अरबाज खान* की पत्नी *मलाइका अरोड़ा* हिंदू हैं और
उसके छोटे भाई *सुहैल खान* की पत्नी *सीमा सचदेव* भी हिंदू है।
आमिर खान के भतीजे 
*इमरान* की हिंदू पत्नी का नाम *अवंतिका मलिक* है।
संजय खान के बेटे 
*जायद खान* की पत्नी *मलिका पारेख* है।
रोज खान के बेटे *फरदीन* की पत्नी *नताशा* है।
*इरफान खान* की बीवी का नाम *सुतपा सिकदर* है।
*नसरुद्दीन शाह* की हिंदू पत्नी *रत्ना पाठक* है
Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉तो क्या धर्म के इन ठेकेदारों को मुस्लिम दामाद अधिक पसंद हैं
*समझ जाओ, ये लोग धर्म के नाम पर सिर्फ राजनीति करते हैं और दंगे करवाते हैं, लेकिन मुसलमानों के खिलाफ सबसे ज्यादा जहर उगलने वाले नेताओं की रिस्तेदारी भी मुसलमानो से ही हैDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd5/1.5/16/2755.png
*
बड़ी मेहनत की है दोस्तों यह लिस्ट पाने में दोस्तों इस लिस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करो
I am Nb.Subedar Salman Ahmad in Indian Army Officer

Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/faa/1.5/16/1f449.png👉इस मेसेज को फ़ॉरवर्ड करना न भूले कम से अपने दोस्तों को तो जरूर करेDescription: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd5/1.5/16/2755.png Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏 Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏Description: https://www.facebook.com/images/emoji.php/v7/fd9/1.5/16/1f64f.png🙏

Friday, March 3, 2017

क्या टीकटों के आबंटन की प्रक्रिया लोकतांत्रिक है???

एक साथी की पोस्ट‬......ओर हमारा जबाब...
स्कूल परीक्षा में*-: तमिलनाडु का मुख्यमंत्री कौन है ?
*उत्तर-:*
*त्रैमासिक परीक्षा : जयललिता*
*अर्धवार्षिक परीक्षा : पनिरसेव्ल्म*
*वार्षिक परीक्षा : पलानी स्वामी*
भयानक मजाक हुआ है तमिलनाडु के बच्चो के साथ .😂😆😂😆😂😆
अश्विनी कुमार "सुकरात": का जबाब..............
शिक्षा को जानकारियों के स्तर से ऊपर उठा कर विश्लेषण और मूल्यांकन के स्तर पर ले जाए..
तमिलनाडु या किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री का चयन करने में पार्टी हाई कमान और विधायक दल में से किसको संविधान ने अधिकार दिया और कौन सा यथार्थ में प्रयोग हो रहा है..
विधायकी सांसदी के लिए टीकटों के आबंटन में किसकी भूमिका यथार्थ में है और क्यों ??
यदि टीकटों का आबंटन में कार्यक्रताओं की भूमिका नदानंद और कार्यकर्ताओं के स्थान पर हाई कमान की ही भूमिका है, पहले जैसे राजा जागीर बाटते थे वैसे ही अब पार्टीहाईकमान उम्मीदवारी की टीकट बटते है, तो क्या हम इस व्यवस्था को लोकतांत्रिक व्यवस्था कहे भी?? कैसे हम इसे लोकतंत्र कह सकते है????
ऐसे प्रश्न जो बच्चों को अपने परिवेश के बारे में मूल्यांकन करने, विचार करने को प्रेरित करे, ऐसे प्रश्नों के सहारे आप एक प्रगतिशील समाज की स्थापना वाली शिक्षा, ज्ञान के निर्माता बन सकते है....क्रमशः
आपका साथी
अश्विनीकुमार "सुकरात"
जनचेतना अभियान (भगतसिंहवादी)
9210473599

वैज्ञानिक द्वंधात्मक भौतिकतादी नजरिया/पैराडाईम

मार्क्सवाद कम्युनिजम के नाम कोई एक नहीं सैकड़ों संगठन और संस्था है..अनेकों स्वतंत्र चिंतक जिनका किसी संगठन से कोई लेना देना नहीं है... मार्क्सवाद जिसे हम वैज्ञानिक द्वंधात्मक भौतिकतादी नजरिया/पैराडाईम भी कह सकते है... इस नजरिए से हम वर्गीय हीत के आधार पर दुनिया को देखते है..पैराडाईम... एक संपत्तिवान और उसके चाटुकारों के वर्गीय आर्थिक हीत संपत्तिहीन वर्ग के हीतों से भिन्न है...संपत्ति मजदूर बनाता है और उसपर अधिकार संपत्तिवान कर बैठ जाता है...मेरे और कई संगठनों की खुद की वैचारिक सहमति माओवादी तरिके से नहीं..कई कम्युनिस्ट संगठन तो सीपीआई और सीपीआईएम को कम्युनिस्ट भी नहीं मानते...क्रमशः
इस मामूली सेज्ञान के साथ...
आपका साथी
अश्विनीकुमार 'सुकरात' जनचेतना-अभियान (भगतसिंहवादी)

देशप्रेम बनाम देशद्रोह

गोधरा में हिन्दु मुस्लमान दंगे देशप्रेम , अयोध्या कांड के बाद सारे देश में दंगे हुए , देशप्रेम,,,नोएडा में बिफ को लेकर देश प्रेम, कश्मीर मेंपाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा कश्मीरी पंडितों को मारा- ये पाकिस्तानियों का देशप्रेम,..1984 में सीखों को मारा ये कांग्रेसियों का देशप्रेम..अभी एक अमेरिकी का देशप्रेम भी दिखा जब नस्लीए गाली के साथ एक भारतीय को गोली मारी........पूरी दुनियाँ में युद्ध के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले और मजदूरों के हीतों की बात करने वाले कम्युनिस्ट देशद्रोही
सेमिनार के आयोजन में 'देशभक्ति' या 'देशविरोधी' नारे बाजी कहा से आ गयी साहेब...
सैमिनार शुद्ध आकादमिक एक्टिविटी है????
आखिर देश विरोधी नारा कौन लगाा रहा था??????
और क्या इस देश की कानून व्यवस्था से छद्म राष्ट्रभक्तों का विश्वास इतना ख़्तम हो चुका है कि कानून अपने हाथ में ले ले...
संघ और बीजेपी के खिलाफ बोलने वालों कि जुबान बंद कर दे..
हमारी बाते कुछ कपटी-राष्ट्रभक्तों सैंसलैस लग रही है..
पर सैंसफुल काम तो शांतिपूर्ण तरिके से चल रहे सेमिनार में पत्थरबाजी करना है..
गुरमेहर ने विरोध किया तो उसे मारने और रेप की धमकी...बाद में अपने को ठीक साबित करने के लिए उसके एक साल पहले की पोस्ट ढुंढ कर लाना जिसमें उसने युद्ध का विरोध किया था उसके आधार पर उसे राष्ट्रद्रोही सिद्ध करना पर ..…
एक बार को आपकी बात को तवज़ों देते हुए हम मान भी ले कि वह राष्ट्रद्रोही है भी उसे रेप/बलात्कार की धमकी देना कहा तक सही है..क्या राष्ट्रप्रेमी को राष्ट्रद्रोही से बलात्कार करने की छुट इस देश का कानून देता है...और नहीं तो धमकी देने वाला अब तक छुट्टा कैसे घुम रहा है...????
यदि कोई 'राष्ट्रप्रेमी' हमें समझा सके तो उसकी अथाः कृपा होगी...
हमने बीजेपी सरकारों के काल के घोटालो के आरोप वाली पोस्ट और बीजेपी के आईएस के लिंक वाली पोस्ट व्टसएप पर जारी जारी की तो हमें धमकी मिली.. अर्थात पूरे देश को गोधरा समझ लिया है. जो बीजेपी के खिलाफ बोलेगा वह राष्ट्रद्रोही और उसे धमकाया जा सकता है, मारा जा सकता है, रेप किया जा सकता है, जलाया जा सकता है,,,,.इनकी सिनाजोरी सैंसफुल हमारा कॉमेंट नोनसैंस होता है...
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1235038336544465&id=100001149309580

Wednesday, November 23, 2016

Black Wealth ( Money ) vs Demonetization

काला धन बनाम नकद-मुद्रा
कितनी कारगर होगी,  विमुद्रीकरण प्रक्रिया
व्यक्ति का धन उसके द्वारा जोड़ी गयी उसकी कुल संपत्ति है । जबकी नोट और सिक्के उस धन का अंश मात्र है और कुल मुद्रा का भी एक हिस्सा भर है । नकदी में नोट और सिक्के आते है जबकि मुद्रा यानी मनी/पैसे में नकद नोटों के साथ बैंक जमा के साथ वे पदार्थ भी आ जाते है, जिनका एक नकद मूल्य है और दूसरे पदार्थों को बेचने और खरीदने के लिए प्रयोग किए जाते है। जबकि व्यक्ति द्वारा जोड़े गये धन में मकान, दूकान, खेत, खलिहान, नकदी, बैंकों में जमा पैसा, सोना-चांदी नामी-बेनामी संपत्ति आदि सब कुछ आता है। कैश/नकदी मुख्यतः तात्कालिक उपभोग जरूरतों और लाभदायक सौदों पर खर्च करने भर के लिए रखी जाती है। उपभोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया खर्च है । शेष बचे भाग को बचत कहते है । उस शेष बचे भाग बचत को लोग लम्बे समय तक करैंसी/नोट के रूप में नहीं रखते। बल्कि उसका प्रयोग पुनः धन-संपत्ति-पूँजी को जोड़ने में कर लिया जाता है । यह बात जितनी सफेद धन्धों पर लागू होती है । उतनी ही गोरख धंधों पर भी । काली कमाई से पैदा हुई, काली बचत भी लम्बे समय तक कैश’ अर्थात 500 और 1000 के नोट के रूप में नहीं रहती है । वह धीरे-धीरे नामी-बेनामी संपत्ति-पूँजी, हवाला के माध्यम से विदेशी जमा आदि में परिवर्तित होती रहती है और बहुत बार तो ऐसा भी होता है कि कमाई सीधे-सीधे वस्तु, विदेशी बांड या संपत्ति-पूँजी के रूप में ही हो जाती है। व्यक्ति के द्वारा संचित धन का एक छोटा सा हिस्सा ही नकदी/कैश में रखी जाती है । मुद्रा या उसके हिस्से के रूप में कैश/नोट वर्तमान खर्चों को पूरा करने भर के लिए रखा जाता है, ना की धन के स्थाई संचयन के साधन के रूप में प्रयोग किया जाता है। व्यक्ति जितना अधिक आर्थिक रूप से कमजोर होता है, वह अपने धन और आय का उतना बडा हिस्सा कैश या मुद्रा के रूप में रखता है और वह जितना अधिक अमीर होता है, उतना कम हिस्सा कैश के रूप में रखता है । एक फुटपाथ पर रहने वाले मजदूर की सारी धन संपत्ति उसके पास रखे चंद सिक्के या नोट मात्र है । मध्यम वर्ग की संपत्ति उन नोटों के साथ बैंक जमा और कुछ जेवरात आदि भी हो सकती है । मध्यम वर्ग भी घरेलू आववश्यकता भर कैस अपने पास रखता है। बाकी बैंक और पोस्टऑफिस की विविध बचत योजनाओं में बचा कर रखता है । ये बात सही है, कैस की मोटी रकम बड़े कालाबाजारियों के पास है। परन्तु बड़े कालाबाजारियों के पास दबे ये 50-60 लाख से 100 लाख रू की नगदी भी उनकी कुल संपत्ति का अंश मात्र ही है । एक 1000-5000 करोड़ की संपत्ति वाले के 50-60 लाख रू डुब भी जाए तो उसे कोई फर्क नहीं पडता है । एक मजदूर जिसके पास है ही जमा पूँजी के नाम पर हो ही 500 के 10 नोट और वो भी अप्रचलित हो जाए तो वह पैसा होते हुए भुखों मरने को मजबूर हो जाएगा।
आम  तौर पर काला धन को लेकर हमारे मन में धारणा बनी हुई है कि टैक्स की चोरी और रिश्वत खोरी से जमा कैस को कहते है। परन्तु यह काले धन की बहुत ही संकीर्ण धारणा है। आओ! कुछ मामलों की छान-बीन द्वारा हम आयपैसानकदी/कैश और संपत्ति के संबंधों की पहेली को सुलझाते है।
बहुत सारी निजी क्षेत्र के स्कूल-कॉलेज,फैक्ट्री और सरकारी क्षेत्र में भी ठेकेदारों द्वारा नियुक्त कर्मचारियों और मजदूरों की भी दो तरह की तनख्वाहे होती है। एक जिस पर साईन/हस्तक्षर लिया जाता है और दूसरी जो हाथ में थमाई जाती है। जो तनख्वाह हकीकत में दी जाती है, साईन/हस्तक्षर उससे कही ज्यादा पर करवाया जाता है। चंद उच्चे दर्जे के स्कूल और कॉलेजों को छोड़ दे तो ये बात इस क्षेत्र में तो आम है। मान ले एक निजी कॉलेज/स्कूल का मनेजमेंट कॉलेज/स्कूल में नियुक्त शिक्षकों से 70-80 हजार रूपयों  पर साईन करवा कर, हाथ में 20-25-30 हजार रूपये की नकद राशि थमा देता है। इसीप्रकार बहुत सारे निजी कॉलेजों में नोन-अटेंडिंग कहलाने वाले शिक्षकों को महीने में एक दिन या इंसपैक्सन/निरक्षण वाले दिन ही बुलाते है। उनसे हस्ताक्षर/साईन पुरी सैलरी पर लेकर हाथ में एक सहायक नगद राशि थमा देते है। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के नाम सैलरी एकाउंट खुलवाया जाता है, परन्तु उस एकाउंट से संबंध एटीएम और चैकबुक हस्ताक्षर के साथ मनेजमैंट अपने पास जमा करवा कर रख लेता है। इस प्रकार मैनेजमेंट प्रति शिक्षक 45 से 70 हजार का सरप्लस/अधिशेष पैदा करता है। कायदे से शिक्षण संस्थान गैर-लाभकारी संस्थान माना जाता है । कागजों पर संस्था घाटे पर दिखाया जाता है । ये भी दिखाया जाता है कि संस्था के शिक्षकों और कर्मचारियों का वेतन/सैलरी कर्ज लेकर दी जा रही है। पर हकीकत ठीक इसके उलट ही है। जहाँ शिक्षकों और कर्मचारियों का जीवन स्तर निम्नतर स्तर पर स्थिर है। उनकी तनख्वाह तो बस सिर्फ कागजों पर ही बढ़ती है। वही कॉलेज मैनेजमेंट के रूप में कॉलेज मालिक दिन दुगुना रात चौगुना धन संचयन करते जाते है। जैसा की आपने अनुभव किया ही होगा कि वेतन आयोगों की सिफारिशों के साथ बाजार में जिन चीज में सबसे पहले बदलाव आता है, उनमें से एक है निजी स्कूल-कॉलेजों की फीस । वेतन आयोग की सिफारिशों की वजह से शिक्षकों के बढ़े वेतन को आधार बना कर ही स्कूल और कालेजों की फीस बढ़ा दी जाती है। वह भी पुरे बकाया के साथउस दिन से जिस दिन से वेतन आयोग की सिफारशे लागू होती है। इस प्रकार एक तरफ शिक्षकों कीकागजी-सैलरी’ का बहाना लेकरजहाँ एक तरफ जहाँ अभिभाववकों से पुरी फिस ली जाती है तो वही दूसरी तरफ शिक्षकों-कर्मचारियों को वाज़िब तनख्वाह का एक-तिहाई हिस्सा भी नहीं दिया जाता। नतिजा, न तो योग्य और काबिल शिक्षक व्यवस्था में आ पाते है। यदि आ भी जाते है तो वे अपनी गुणवता को बनाए नहीं रख पाते।परिणाम शिक्षण की गुणवता में गिरावट आती है। कायदे से स्कूल और कॉलेज के कुल खर्च का 70 फिसदी शिक्षकों की सैलरी पर खर्च किया जाना चाहिए और कागजों पर किया भी जाता है। स्कूल-कॉलेजों की फीस का निर्धारण शिक्षकों की कागजों पर दी जाने वाली सैलरी के आधार पर ही किया जाता है, वही सैलरी जिस पर उनसे साईन करवाया जाता है। शिक्षकों/प्रोफेसरों की नियुक्ति का आधार योग्यता नहीं बल्क़ि मनैजमेंट की काली नीति को स्वीकार करने की मौन सहमती है। जो मनैजमेंट की काली नीति का जितना ज्यादा मौन समर्थन देगा, वह उतना योग्य शिक्षक होगा। इस प्रकार मनेजमैंट की काली प्रक्रिया की वजह से काला धन सफेद साधनों के साथ पैदा होता है।
इस प्रकार के कर्मचारियों और श्रमिकों के श्रम की लुट हर प्रकार के निजी संस्थानों में देखने को मिलती है। इस प्रकार संस्थाओं के मालिक जहाँ एक तरफ अपना खर्च अधिक दिखा कर जहाँ लाभ पर लगने वाले टैक्स से बचा लेते है। वही कर्मचारियों के टैक्स को भी सही से जमा न करा कर, उनके टैक्स की भी चोरी करते है। बहुत सारे कर्मचारी एक साल से कम अवधी में ही नौकरी से निकाल दिए जाते है या खुद बेहतर विकल्प की तलास में नौकरी छोड़ कर चले जाते है। चुकीं आय पर कर सालाना आधार पर लगता है, अतः उनकी सैलरी पर लगने वाले टैक्स को जमा ही नहीं करवाया जाता। इस प्रकार ये संस्थान ऐसे कर्मचारियों को भी आर्थिक अपराधी बना देती है। बड़ी बड़ी निजी कम्पनियाँ अपने नीचे सब्सिडरी कम्पनियाँ बनाती है । इन सब्सिडरी कम्पनियों का काम मुख्य कम्पनियों को माल और सेवा की पूर्ति करना होता है। सब्सिडरी कम्पनियों से ऊँची लागत पर माल और सेवा की पर्ति मुख्य कम्पनी को की जाती है और इस प्रकार मुख्य कंपनी की लागत ऊँची हो जाती है जिससे एक तो मुख्य कम्पनी के लाभ कम होने से कॉर्पोरेट टैक्स कम हो जाता है। तो दूसरा ग्रहकों से मुख्य कम्पनी द्वारा बेचे जाने वाले माल और सेवा के ऊँचे मूल्य के औचित्य को दिखा कर, ऊँचा मूल्य वसूल लिया जाता है। अतः इन मामलों की जाँच कर पाया कि काला धन सिर्फ नगदी/कैस रूप में ही नही होती है। बल्की वह बैंक जमा के रूप में भी हो सकता है और बैंक जमा से ही सीधे संपत्ति के एक रूप में फिर दूसरे रूप में परिवर्तित होता रहता है। उदाहरण के तौर पर कर्मचारियों के जमा चैक का प्रयोग सोना खरीदने में और फिर उस सोने से नामी-बेनामी संपत्ति या फैक्टरी आदि लगाने में कर लिया जाता है। चुकीं हर जगह टैक्स अदा किया जाता है। अतः ये काली प्रक्रिया किसी के पकड़ में नहीं आती है।
चलिए काले धन और नकदी/कैस के संबंध को समझने के लिए रिश्वत खोरी के एक मामले की जाँच करते है ।
मान ले एक बेईमान सरकारी अफसर/कर्मचारी को एक साल में सरकारी सेवा के ऐवज़ में दस लाख रुपयें की आय अर्जित होती है। रिश्वत के रूप में पचास लाख की नकदी और बीस लाख का सोना भी कमा लेता है । उसी साल , एक घोटाले में मुँह बंद रखने के ऐव़ज में पचास लाख के बाजार मूल्य का फ्लाट दो लाख में अपनी पत्नी या बेटे के नाम लिखवा लेता है। इस प्रकार उसकी एक साल की कुल आय / कमाई एक करोड़ तीस लाख हुई । उस एक करोड़ तीस लाख में से वह एक साल में पच्चीस लाख अपनी अनाप-सनाप विलासतापूर्ण जीवन जीने पर खर्च कर देता है। तो उसके पास एक साल में नामी और बेनामी तरिके से कुल संचित धन एक करोड़ पांच लाख का हो गया। माना पाँच लाख का सोना रसीद के साथ अपनी जायज आय की बचत के रूप में दिखाता है तो शेष एक करोड़ की संपत्ति ही उसकी एक साल की जोड़ी काली संपत्ति के रूप में गिनी जाएगी। पचास लाख की जो रिश्वत उसने कैश के रूप में हासिल की उसमें से 45 लाख उसने सोना, जमीन-जायदाद खर्च करने के लिए खर्च कर दिए तो शेष पांच लाख ही उसके पास करैसी/नकदी/नोट के रूप में रह जाती है। मान ले उसने पिछले 20 सालों में रिश्वत आदि के माध्यम से जो भी करैंसी/नोट प्राप्त किया उससे उसने 80 करोड़ मूल्य की संपत्ति जोड़ ली । उसकी कुल संपत्ति में 5 लाख की ही करैसी/नकदी है। उस पांच लाख में से उसके पास 4 लाख 500 और 1000 के नोट के रूप में शेष 100-50 के नोट के रूप में है। तो मोदी जी द्वारा किए 500-1000 के नोटों पर किए गये इस डीमोनेर्ट्रीईजेसन/विमुद्रीकरणऑपरेशन’ (नोट पर सर्जिकल स्ट्राइक ) का असर सिर्फ 4 लाख की करैसी पर ही दिखेगा। अब वह चाहे तो उसे वह इस साल और पिछले सालों का स्त्री धन (पत्नी की घरेलू बचत) दिखा दे और जमा कर दे या उसे नष्ट कर दे या कुछ मजदूरों की सहायता से एक्सचेंज  करा ले। किसी भी स्थिति में उस पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है । 4 लाख रू उसकी कुल काली संपत्ति का इतना छोटा हिस्सा है  कि उसके 100नष्ट हो जाने पर भी उस व्यक्ति की कुल संपत्ति पर को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला । हराम की काली कमाई भी बहता हुआ धन है। ये बात ठीक है कि ये  बिना कानूनी हिसाब के नोट के रूप में आती है । पर वह आ कर दब कर बैठ नहीं जाती है। उसका भी सर्कुलर फ्लो/चक्रिये प्रवाह होता है । उस नगद पैसों को सोना चाँदी, नामी-बेनामी संपत्ति और काली पूँजी में लगा कर, उसके माध्यम से और अधिक काला धन पैदा करने में किया जाता है। जब तक काले धन पैदा करने की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगई जाती, तब तक डीमोनेर्ट्रीईजेसन/विमुद्रीकरण ऑपरेशन का प्रयास एक सतही दिखावटी प्रयास भर रहेगा।
मोदी जी ! काला धन "कैस" में नहीं अघोषित और बेनामी संपत्ति के रूप में संचित है। इस सतही दिखावटी प्रक्रिया से कुछ भी हासिल होने वाला नहीं। जिन लोगों 8 नवम्बर 2016  ......

मोदी जी !! इतना बड़ा फैसला लेने से पहले कम से कम आपने बेसिक इकोनॉमिक्स तो समझ ही ली होगी। काला धन रखने वाले लोग भी अपने कुल धन का एक छोटा सा अंश ही कैस/नकदी’ के रूप में रखते है। असल काला धन सिर्फ नामी और बेनामी संपत्ति के रूप में ही संचित नहीं है, वह तो बॉड़ और विदेशी-देशी सिक्वेरिटिज के रूप में निरंतर चल-मान है। वह तो इन सब को पैदा करने वाली एक काली प्रक्रिया है, जो काले धन को पैदा करती है।

Saturday, October 23, 2010

¡¡¡¡¡¡¡¡¡¡×ã´U»æ§üU ÒÇUæØÙÓ Ùð ç·¤âð ç·¤Øæ ×æÜæ×æÜ ¥æñÚU ·¤æñÙ ãéU¥æ ·´¤»æÜ?

  ¡¡¡¡¡¡¡¡¡¡×ã´U»æ§üU ÒÇUæØÙÓ Ùð ç·¤âð ç·¤Øæ ×æÜæ×æÜ ¥æñÚU ·¤æñÙ ãéU¥æ ·´¤»æÜ?
¥æÁ·¤Ü ÒÂèÂÜè Üæ§UßÓ ·¤æ °·¤ »èÌ ·¤æ$Ȥè Üæð·¤çÂýØ ãéU¥æ ãñU çÁâ·ð¤ ×æŠØ× âð °·¤ Âý×é¹ âæ×æçÁ·¤-¥æçÍü·¤ â×SØæ ×ã´U»æ§üU ·¤è ¥æðÚU ŠØæÙ ¥æ·¤çáüÌ ·¤ÚUÙð ·¤æ ÂýØæâ ç·¤Øæ »Øæ ãñUÐ »èÌ ·ð¤ ÕæðÜ ãñ´U - Òâ§üUØæ´ Ìæð ÕãéUÌ ·¤×æÌ ãñ´U, ×ã´U»æ§üU ÇUæØÙ ¹æ§üU ÁæÌ ãñÐÓ ØæÙè ÚUæÌ-çÎÙ ·¤æ× ·¤ÚUÙð ·ð¤ ÕæßÁêÎ ·¤×æ§üU ·¤è ¥Âðÿææ ×ã´U»æ§üU ·¤§üU »é‡ææ ¥çŠæ·¤ ÕɸUÌè Áæ ÚUãUè ãñUÐ ¥ÌÑ ƒæÚU ×ð´ Áæð ÁM¤ÚUè ÂÎæÍü ¥æÙð ¿æçãU°, ßð ÙãUè´ ¥æ ÂæÌðÐ
Áñâæ ç·¤ ¥æÂ ÁæÙÌð ãñ´U ç·¤ çã´UUÎê Šæ×ü»ý´Íæð´ ×ð´ ÒÇUæØÙÓ ·¤æ çÁ·ý¤ ¥æÌæ ãñU Áæð àææ´çÌçÂýØ ÚUãUÙð ßæÜð Üæð»æð´ ·ð¤ ƒæÚU ·¤è âé¹-àææ´çÌ ©UÁæÇ¸Ìè ãñÐ ÂÚU ßãU ØãU ·¤æ× ¥·ð¤Üð ÙãUè´ ·¤ÚUÌè, ¥çÂÌé UUog rks ¥ÂÙð Sßæ×è ·ð¤ ¥æÎðàæ âð ·¤æØü ·¤ÚUÌè ãñUÐ âéÚUâæ Áñâè ÇUæØÙ Ùð ÚUæß‡æ Áñâð ¥ã´U·¤æÚUè ÚUæÁæ ·¤è âðßæ ·¤è Ìæð ÂêÌÙæ Ùð ·´¤â Áñâð ¥ˆØæ¿æÚUè àææâ·¤ ·¤èÐ ¥ÌÑ çâ$Èü¤ ×ã´U»æ§üU ·¤æð ·¤æðâÙð âð ·¤æ× ÙãUè´ ¿Üð»æ, ¥çÂÌé ×ã´U»æ§üU ·ð¤ Sßæ×è ÒÎæÙßÓ ·¤æð Öè ¹æðÁ ©Uâ·¤è ÙæçÖ ×ð´ ßæÚU ·¤ÚUÙæ ãUæð»æ ÌÕ Áæ ·¤ÚU ãUè ãU× ×ã´U»æ§üU Áñâè ÒÇUæØÙÓ ·ð¤ ¿´»éÜ âð çÙ·¤Ü ÂæØð´»ðÐ
âßüÂýÍ×, ÂýàÙ ØãU ©UÆUÌæ ãñU ç·¤ €Øæ ×ã´U»æ§üU ·¤æ ÂýÖæß â×SÌ â׿Á ÂÚU â×æÙ M¤Â âð ÂÇ¸Ìæ ãñU? ·¤Îæç ÙãUè´Ð â׿Á ×ð´ Îæð ÌÚUãU ·ð¤ Üæð» ãUæðÌð ãñ´UÐ °·¤ ßð çÁÙ·¤è ¥æØ ·¤æ âýæðÌ ©UÙ·¤è ×ÊæÎêÚUè ãñU ¿æãðU ßãU àææÚUèçÚU·¤ ãUæð Øæ ׿ÙçⷤРÎêâÚUè ÌÚUȤ, ßð çÁÙ·¤è ¥æØ ·¤æ âýæðÌ â´Âçžæ ãUæðÌè ãñUÐ ¥ÍæüÌ÷ Øð Üæð» ŽØæÁ, ç·¤ÚUæØæ ÌÍæ ÜæÖ ·ð¤ M¤Â ×ð´ ¥çŠæàæðá ¥çÁüÌ ·¤ÚUÌð ãñ´UÐ â׿Á ·ð¤ ÂýÍ× ß»ü ×ð´ ¥æÙð ßæÜð Üæð»æð´ ×ð´ Öè Îæð ß»ü ãUæðÌð ãñ´UÐ °·¤ ß»ü ¥â´»çÆUÌ ÿæð˜æ ×ð´ ·¤æ× ·¤ÚUÙð ßæÜæð´ ·¤æ ãñU çÁâ·¤è ¥æØ Âê‡æüÌÑ ÁÇ¸Ìæ ·¤è çSÍçÌ ×ð´ ãñUÐ ÎêâÚUè ÌÚUȤ, âÚU·¤æÚUè ÕæÕê-·¤×ü¿æÚUè ãñ´U çÁÙ·¤è ¥æØ ×ã´U»æ§üU ·ð¤ çãUâæÕ âð ·é¤ÀU ÕɸU ÁæÌè ãñUÐ
×ã´U»æ§üU ãU×ðàææ â´ÂçžæŠææÚUè ß»ü ·ð¤ Âÿæ ×ð´ ãUæðÌè ãñU, €Øæð´ç·¤ ×ã´U»æ§üU ·ð¤ ÎæñÚU ×ð´ ©Uâ·¤è â´Âçžæ ·¤è ·¤è×Ìð´ ÕɸUÌè ãñ´UРȤÜSßM¤Â ©Uâ·¤æ ÜæÖ Öè ÌðÁè âð ÕɸUÌæ ãñUÐ ØçÎ ×ã´U»æ§üU ·¤è ÎÚU Âæ´¿ ÂýçÌàæÌ âð ·¤× ãUæð ÁæØð Ìæð Øð Üæð» ©Uâð ×´Îè ·¤ãU ·¤ÚU ãUæØ-ÌæñÕæ Ì¿æÌð ãñ´UÐ âèç×Ì ¥æØ ·¤×æÙð ßæÜð Üæð» ¿æãðU ßð ¥â´»çÆUÌ ÿæð˜æ ·ð¤ ×ÊæÎêÚU ãUæð´ Øæ ç·¤âæÙ, ©UÙ·¤è ¥æØ ×ð´ ãUæðÙð ßæÜð ÂçÚUßÌüÙ ·¤è ¥Âðÿææ ×ã´U»æ§üU ×ð´ ãUæðÙð ߿ܿ ÂçÚUßÌüÙ ·¤ãUè´ ¥çŠæ·¤ ãUæðÌæ ãñUÐ §âU ß»ü ·ð¤ Üæð» ¥ÂÙè ¥æØ ·¤æ ¥çŠæ·¤Ì× çãUSâæ Ü»Ö» y® ÂýçÌàæÌ ¹æl ÂÎæÍæðZ ÂÚU ¹¿ü ·¤ÚU ÎðÌð ãñ´UÐ ¥ÌÑ ×ã´U»æ§üU çßàæðáÌÑ ¹æl ÂÎæÍæðZ ·¤è ·¤è×Ìæð´ ×ð´ ãUæðÙð ßæÜè ÕɸUæðžæÚUè ·¤æ ÂýˆØÿæ ÂýÖæß §Uâè ß»ü ÂÚU Îð¹Ùð ·¤æð ç×ÜÌæ ãñU, ÁÕç·¤ â´ÂçžæßæÙ ©U‘¿ ß»ü ×ã´U»æ§üU ·ð¤ ȤÜSßM¤Â ÚUæÌæð´ÚUæÌ ×æÜæ×æÜ ãUæð ÁæÌæ ãñUÐ €Øæ ¥æÂÙð ·¤Öè âæð¿æ ãñU ç·¤ ÕæÊææÚU âð Áæð ×ã´U»è âçŽÊæØæ´ ¥æÂ ¹ÚUèÎ ·¤ÚU ÜæÌð ãñ´U, ©Uâ·¤æ ȤæØÎæ ©Uâ·ð¤ Èé¤ÅU·¤ÚU çß·ýð¤Ìæ Øæ ç·¤âæÙ ·¤æð ç×Ü ÂæÌæ ãñU? ¥æÂ·¤æð ÁæÙ·¤ÚU ¥æà¿Øü ãUæð»æ ç·¤ Èé¤ÅU·¤ÚU çß·ýð¤Ìæ Áæð ׿˜æ ·¤×èàæÙ °Áð´ÅU ãUæðÌæ ãñU ÌÍæ ç·¤âæÙ Áæð ¥ÂÙð ©UˆÂæÎ ·¤æð Õð¿Ùð ·¤æð ¥æñÙð-ÂæñÙð Îæ×æð´ ÂÚU ×ÁÕêÚU ãUæðÌæ ãñU Ìæç·¤ ¥ÂÙ𠹿ü çÙ·¤æÜ â·ð¤Ð ©Uâð Ìæð §Uâ ×ã´U»æ§üU ×ð´ ·é¤ÀU ç×ÜÌæ ãUè ÙãUè´ ãñUÐ ©UÎæãUÚU‡æ ·ð¤ çܰ Áæð ¥ÚUãUÚU ·¤è 뾆 ¥æÂ v®® L¤ÂØð ÂýçÌ ç·¤Üæð»ýæ× ·ð¤ Öæß âð ¹ÚUèÎÌð ãñ´U, ßãU ç·¤âæÙ âð ׿˜æ x® L¤ÂØð ÂýçÌ ç·¤Üæð»ýæ× ×ð´ ¹ÚUèÎè ÁæÌè ãñUÐ ¥ÍæüÌ÷ |® L¤ÂØð ÂýçÌ ç·¤Üæð ·¤æ ¥çŠæàæðáÐ ¥æç¹ÚU ØãU ¥çŠæàæðá ÁæÌæ ·¤ãUæ´ ãñU? ØãU ÁæÌæ ãñU Îðàæè-çßÎðàæè â^ðUÕæÁæð´ ·¤è ÁðÕ ×ð´Ð â^ðUÕæÁè çÁâð ¥Õ âÚU·¤æÚU Ùð Øê¿ÚU ÅþðUçÇ´U» ·¤æ ·¤æÙêÙè Áæ×æ ÂãUÙæ çÎØæ »Øæ ãñU, §Uâ Šæ´Šæð ×ð´ Îðàæè-çßÎðàæè Âê´ÁèÂçÌØæð´ âçãUÌ ãU׿ÚÔU ÚUæÁÙðÌæ â×æÙ M¤Â âð ÂýçÌÖæ»è ãñ´UÐ Øð ÕǸè-ÕÇ¸è ·´¤ÂçÙØæ´ Âýæ‰æç×·¤ ÕæÊææÚU (¹ðÌæð´) âð ¥æñÙð-ÂæñÙð Îæ× ÂÚU ¹æl ÂÎæÍæðZ ·¤è ¹ÚUèÎ ·¤ÚUÌè ãñ´U ÌÍæ â^ðUÕæÁè ·¤ÚU·ð¤ §UÙ·¤è ·¤è×Ìð´ ÕɸUæÌè ãñU´Ð ãU׿ÚUè âÚU·¤æÚU ·¤æð ¿ÜæÙð ßæÜð Ùæñ·¤ÚUàææãU °ß´ ÚUæÁÙðÌæ ÁæÙÕêÛæ ·¤ÚU °·¤ Ìæð ¹æl ÂÎæÍæðZ ·¤è âÚU·¤æÚUè ¹ÚUèÎ ·¤× ·¤ÚUÌð ãñ´U, ÎêâÚUè ÌÚUȤ âÚU·¤æÚUè »æðÎæ×æð´ ×ð´ ÂǸð ¥ÙæÁ ·¤æð âǸÙð ÎðÌð ãñ´UÐ ©U‹ãð´U ¥æñÙð-ÂæñÙð Îæ×æð´ ÂÚU àæÚUæÕ ÕÙæÙð ßæÜè ·´¤ÂçÙØæð´ ·¤æð Õð¿ ÎðÌð ã´ñUÐ ÁÕ ¥ÙæÁ ·¤è ·¤è×Ìð´ ¥´ÌÚUÚUæcÅþUèØ ÕæÊææÚU ×ð´ ·¤× ãUæðÌè ãñ´U ÌÕ ãU׿ÚÔU Îðàæ ·¤è âÚU·¤æÚU ¥ÙæÁ ·¤æ çÙØæüÌ ·¤ÚUÌè ãñU ÌÍæ ·¤è×Ìð´ ÕɸUÌè ãñ´U Ìæð ç$ȤÚU ¥ÙæÁ ·¤æ ¥æØæÌ ·¤ÚUÌè ãñ´UU, ßãU Öè ©Uâ âǸð ãéU° ¥ÙæÁ ·¤æ Áæð ÁæÙßÚUæð´ ·ð¤ ¹æÙð ÜæØ·¤ Öè ÙãUè´ ãUæðÌæÐ
×ã´U»æ§üU ÕɸUÙð ·¤æ °·¤ ÎêâÚUæ ·¤æÚU‡æ ·ë¤çá ÿæð˜æ ×ð´ ©UˆÂæÎÙ ×ð´ ãUæðÙð ßæÜè ·¤×è ãñUÐ ãUæÜæ´ç·¤ ØãU ·¤ÎæçÂ Ìæˆ·¤æçÜ·¤ ÙãUè´ ãUæð â·¤Ìæ, €Øæð´ç·¤ ©UˆÂæÎÙ ·ð¤ ×é·¤æÕÜð Ù Ìæð ÁÙâ´Øæ ÚUæÌæð´ÚUæÌ z® ÂýçÌàæÌ ÕɸU â·¤Ìè ãñU Ù ãUè Üæð»æð´ ·¤è ·ý¤Øàæç€ÌÐ
Ù§üU ¥æçÍü·¤ ÙèçÌØæð´ ·ð¤ Âà¿æÌ âð ãUè ·ë¤çá ÿæð˜æ ×ð´ ãUæðÙð ßæÜè çß·¤æâ ÎÚU ·¤× ÚUãUè ãñU ÌÍæ â·¤Ü çß·¤æâ ÎÚU ·ð¤ ÕɸUÙð ·ð¤ ÕæßÁêÎ ÚUæðÁ»æÚU ×ð´ Öè ßëçh ·¤× ãUè ãéU§üU ãñUÐ ÂæÆU·¤æð´ ·¤æð ™ææÌ ãUæð ç·¤ ãU׿ÚÔU Îðàæ ·¤è {® ÂýçÌàæÌ ¥æÕæÎè ¥Öè Öè ·ë¤çá ÿæð˜æ ÂÚU çÙÖüÚU ãñUÐ ·ë¤çá ÿæð˜æ ×ð´ ·¤æ× ·¤ÚUÙð ßæÜð ×ÊæÎêÚUæð´ ÌÍæ ¥æñlæðç»·¤ ÿæð˜æ °ß´ âðßæ ÿæð˜æ ×ð´ ·¤æ× ·¤ÚUÙð ßæÜð ×ÊæÎêÚUæð´ ·¤è ¥æØ ÕɸUÙð ·¤è â´ÖæßÙæ Ù»‡Ø ãñUÐ ¥ÌÑ ·ý¤Øàæç€Ì ·ð¤ ÕɸUÙð ·¤æ âᑚ ãUè ÂñÎæ ÙãUè´ ãUæðÌæÐ ×êÜ ·¤æÚU‡æ Ìæð ØãU ãñU ç·¤ Áñâð-Áñâð ¥ÍüÃØßSÍæ ÂÚU Öê×´ÇUÜè·¤ÚU‡æ ·¤æ ÎÕæß ÕɸUÌæâ »Øæ, ¹ðÌæð´ ×ð´ ¹æl ÂÎæÍæðZ ·¤æð ©U»æÙð ·ð¤ SÍæÙ ÂÚU »ñÚU ¹æl ÂÎæÍæðZ ·ð¤ ©U»æÙð ÂÚU ÕÜ çÎØæ ÁæÙð Ü»æUÐ Áñâð-Áñâð ¥ÍüÃØßSÍæ ÂÚU Öê×´ÇUÜè·¤ÚU‡æ ·¤æ ÎÕæß ÕɸUæ, ¹ðÌè ×ð´ ¹æl ÂÎæÍæðZ ·ð¤ SÍæÙ ÂÚU »ñÚU ¹æl ÂÎæÍü ©U»æÙð ÂÚU ÕÜ çÎØæ ÁæÙð Ü»æ Áñâð ÕæØæð ÌðÜ ÕÙæÙð ßæÜè çÁ´â ¥æçÎÐ âÚU·¤æÚU Ùð ·ë¤çá ÿæð˜æ ·¤è ×êÜÖêÌ ¥æßàØ·¤Ìæ¥æð´ ·¤è ÌÚUȤ ŠØæÙ ÎðÙæ Ìæð Õ´Î ãUè ·¤ÚU çÎØæ ¥æñÚU ·¤ÚÔU Öè €Øæð´ Ùæ?
âÚU·¤æÚU ·¤è ¥Šææðâ´ÚU¿Ùæ-çÙßðàæ ©UÙ ÿæð˜ææð´ ×ð´ ¥çŠæ·¤ ãéU¥æ Áæð ¥æŠæéçÙ·¤ Öê×´ÇUÜè·ë¤Ì Âê´ÁèßæÎ ·¤è ÁM¤ÚUÌ ·ð¤ ¥ÙéM¤Â ãñ´UÐ
âÚU·¤æÚU ·¤æ ØãU ÖÚUâ·¤ ÂýØæâ ÚUãUæ ãñU ç·¤ ç·¤ ãU׿ÚÔU ç·¤âæÙ ÕãéUÚUæcÅþUèØ ·´¤ÂçÙØæð´ ·ð¤ çÎàææçÙÎðüàææð´ ·ð¤ ¥ÙéM¤Â ©UˆÂæÎÙ ·¤ÚÔ´UÐ ¥ÌÑ ßð ¹æl ÂÎæÍæðZ ·¤è ÕÁæØ ÕæØæð ØêÜ °ß´ »ñÚUÁM¤ÚUè ÂÎæÍæðZ ·¤æ ©UˆÂæÎÙ ·¤ÚÔ´U Áñâð ¥´»ýðÊææð´ ·ð¤ Á׿Ùð ×ð´ ãU׿ÚÔU ç·¤âæÙ ÙèÜ ·¤è ¹ðÌè ç·¤Øæ ·¤ÚUÌð ÍðÐ ¥ÌÑ ×ã´U»æ§üU ¥æñÚU ·é¤ÀU ÙãUè´ ÕãéUÚUæcÅþUèØ ·´¤ÂçÙØæð´ ·¤è ãUè ÇUæØÙ ãñU çÁâð ÚUæÁÙðÌæ¥æð´ ¥æðÚU ÃØßSÍæ ·¤æ â×ÍüÙ ÂýæŒÌ ãñUÐ ¥æñÚU ãUæð Öè €Øæð´ ÙãUè´, ãU׿ÚÔU àææâ·¤ ß»ü-ÚUæÁÙðÌæ ÌÍæ Ùæñ·¤ÚUàææãU ÎæðÙæð´ ·¤æ ÃØç€Ì»Ì çãUÌ §Uâ×ð´ ãñUÐ ãUæ´, ÂèçÇ¸Ì ãñU Ìæð Îðàæ ·¤è }® ÂýçÌàæÌ ¥æÕæÎè çÁâ·¤è ¥æ×ÎÙè âèç×Ì ãñU ¥æñÚU çÁâ·¤è ¥æØ ×ð´ ÁÇ¸Ìæ ãñUÐ
Üæð»æð´ ·¤è ¹ÚUèÎÙð ·¤è ÿæ×Ìæ ×ã´U»æ§üU ÕɸUÙð ·ð¤ âæÍ ãUè ·¤× ãUæðÌè »§ü ãñU ¥æñÚU ÖæðÁÙ ·¤è ÍæÜè âð Âæðá·¤ Ìˆß »æØÕ ãUæð »Øð ãñ´UÐ ƒæÚUæð´ âð Õ‘¿æð´ ·ð¤ ÕSÌð ¥æñÚU ç·¤ÌæÕð´ »æØÕ ãUæðÌè Áæ ÚUãUè ãñ´UÐ Õè׿ÚUè ·¤è ¥ßSÍæ ×ð´ §UÜæÁ ·¤ÚUæÙð ·¤è ÿæ×Ìæ ¹ˆ× ãUæð »§üU ãñUÐ ¥ÌÑ â׿Á ·ð¤ $»ÚUèÕ ß»ü ·¤æð àææâ·¤ ß»ü ¿æãðU ßãU âžææ ×ð´ ãUæð Øæ çßÂÿæ ×ð´, ÚUæãUÌ ÙãUè´ Âãé´U¿æ â·¤ÌæÐ çßÚUæðŠæè ÎÜ ×ã´U»æ§üU ·ð¤ ×égð ÂÚU Õ´Î ·¤ÚUæØð´ Øæ â´âÎ ×ð´ ã´U»æ×æ ·¤ÚÔ´U, $»ÚUèÕè ÎêÚU ·¤ÚUÙð ·¤æ ÂýØæâ ÙãUè´ ·¤ÚU â·¤ÌðÐ ×ã´U»æ§üU ·ð¤ ßæSÌçß·¤ ·¤æÚU‡ææð´ ÂÚU ÂýãUæÚU ÙãUè´ ·¤ÚU â·¤ÌðÐ âžææŠææÚUè ׿ñçÎý·¤ ¥æñÚU ÚUæÁ·¤æðáèØ ©UÂæØæð´ ·¤æ ¥ÂÙæÙð ·¤æ ׿˜æ çιæßæ ãUè ·¤ÚU â·¤Ìð ãñ´UÐ ¥ÌÑ âžææŠææÚUè ÌÍæ çßÚUæðŠæè, ÎæðÙæð´ ×ã´U»æ§üU ·ð¤ ×égð ÂÚU ÁÙÌæ ·¤æð ÕÚU»ÜæÙð ·¤è ·¤æðçàæàæ Ìæð ·¤ÚU â·¤Ìð ãñ´U, ÂÚU ÁÙÌæ ·¤æð ×ã´U»æ§üU âð çÙÁæÌ ÙãUè´ çÎÜæ â·¤Ìð ãñ´U, €Øæð´çð·¤ â´âÎ ×ð´ ÕñÆðU ÚUæÁÙðÌæ¥æð´ ·¤æ ß»èüØ çãUÌ Âê´ÁèÂçÌØæð´ ·ð¤ âæÍ ãñU Ù ç·¤ Öê¹è-çÕܹÌè ÁÙÌæ ·ð¤ âæÍÐ ¥ÌÑ ØçÎ ÁÙÌæ ¿æãUÌè ãñU ç·¤ ×ã´U»æ§üU Áñâè â×SØæ ·¤æ ßæSÌçß·¤ â׿пæÙ ãUæð Ìæð ©Uâð ßÌü×æÙ ÃØßSÍæ ·ð¤ çâÂãUâæÜæÚUæð´ ·¤æð ©U¹æÇ¸ Èð´¤·¤Ùæ ãUæð»æ ¥æñÚU ©Uâ·ð¤ SÍæÙ ÂÚU °ðâè ÃØßSÍæ ·¤æØ× ·¤ÚUÙè ãUæð»è Áæð }® ÂýçÌàæÌ ÁÙÌæ ·ð¤ çãUÌæð´ ·ð¤ ¥ÙéM¤Â ·¤æØü ·¤ÚÔUÐ ØãU Ìæð ãéU§üU ¥Öè ŠæÇ¸ ·¤è ÕæÌÐ §Uâ ÎæÙß ·¤è ÙæçÖ ×ð´ Ìæð ¥æ§üU°×°È¤ Áñâè ¥´ÌÚUÚUæcÅþUèØ â´SÍæ ãñU Áæð ¥×ðçÚU·¤æ Áñâð âæ×ýæ’ØßæÎè Îðàæ ·ð¤ §UàææÚÔU ÂÚU ÕãéUÚUæcÅþUèØ ·´¤ÂçÙØæð´ ·¤æ ¥Ë çß·¤çâÌ Îðàææð´ ×ð´ ÂýâæÚU ·¤ÚUÙð ×ð´ âãUæØÌæ ÎðÌè ãñUÐ §Uâ â´SÍæ ·¤è âæãêU·¤æÚUè ÙèçÌØæð´ ·¤æð ¹ˆ× ç·¤Øð çÕÙæ §Uâ ÎæÙß ·¤æ â×êÜ Ùæàæ ÙãUè´ ãUæð â·¤ÌæÐ ¥ÌÑ ÁÙÌæ ØçÎ ×ã´U»æ§üU ÇUæØÙ ·¤æð ¹ˆ× ·¤ÚUÙæ ¿æãUÌè ãñU Ìæð ßãU ÚUæcÅþUèØ SÌÚ ÂÚU ãUè ÙãUè´, ¥´ÌÚUÚUæcÅþUèØ SÌÚU Öè â´ƒæáü ·¤ÚUÙð ãðUÌé ¥æ»ð ÕɸðU ¥æñÚU Ùß Âê´ÁèßæÎè âæ×ýæ’ØßæÎ ·¤æ â×êÜ Ùæàæ ·¤ÚÔUÐ
- ¥çàßÙè ·é¤×æÚU